पति-पत्नी दोनों छत पर बैठे हुए थे। दारू पीते हुए पति बोला मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता पत्नी — “सही में ? लेकिन ये तुम बोल रहे हो या दारू। पति — ” मैं ही बोल रहा हूं दारू से।
पत्नी:- अजी सुनते हो ? हमारी शादी करवाने वाले पंडित जी का देहांत हो गया। पति :- एक ना एक दिन तो उसे उसके कर्मों का फल मिलना ही था।
पति : मेरे लिए तो दूर-दूर से रिश्ते आते थे। पत्नी : नजदीक रहने वाले तुम्हारे लच्छन जानते होंगे !
पत्नी- पता है, औरतें अपने बच्चों को तेज आवाज में क्यों डांटती हैं? पति- नहीं, बताओ क्यों? पत्नी- ताकि पतियों में भी खौफ बना रहे।
सुबह-सुबह पत्नी नींद से उठते ही बोली, अजी सुनते हो? बोलो! क्या हुआ ? पत्नी, “मुझे सपना आया कि आप मेरे लिए हीरों का हार लेकर आए हो। पति, ठीक है, तो वापिस सो जा और पहन ले।
पत्नी : कहाँ हो? पतिः आफिस में हूँ, क्यों क्या हुआ? पत्नी: कुछ नही वो पड़ोसन भाग गयी है इसलिए पूछा
पत्नी :- तुम मुझे कितना प्यार करते हो ? पति :- जितना तुम सकती.. सोच भी नहीं सकती.. पत्नी :- फिर भी कितना…? पति : – इतना की दिल करता है, तुम्हारी जैसी एक और ले आऊ..
पत्नी : शादी से पहले तुम बहुत मंदिर जाते थे। अब क्या हो गया ? पति छ : फिर तुमसे शादी हो गयी…. और भगवान से भरोसा उठ गया.।
पत्नी- सुनो जी अख़बार में खबर है कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को बेच डाला ? पति- ओह! कितने में ? पत्नी- एक साइकिल के बदले में, कहीं तुम भी तो ऐसा नहीं करोंगे. पति- मैं इतना मूर्ख थोड़े ही हूं, तुम्हारे बदले में तो कार आ सकती हैं…
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