खिलाड़ी जीतने के बाद मेडल को क्यों काटते हैं, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह Why players cut the medal after winning, know the reason behind it
ओलंपिक खेलों में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह गोल्ड मेडल जीते। इसके लिए वह कई सालों तक कड़ी मेहनत भी करता है। आपने कभी न कभी ओलंपिक या और किसी गेम में ज़रूर देखा होगा की जब कोई उस गेम को जीत जाता है तो जीतने के बाद मिलने वाले मेडल को खिलाड़ी अपने दांत (biting medals) से जरूर काटते हैं। और ज्यादतर ये काम वो करते है जिन्होंने गोल्ड मैडल जीता हो। किसी भी खेल में प्रथम स्थान पाने वाले खिलाड़ी को गोल्ड मेडल, सेकेंड आने वाले को सिल्वर मेडल और तीसरे नंबर पर आने वाले को कांस्य यानी कॉपर का मेडल दिया जाता है।आइए अब जानते हैं कि ओलंपिक या किसी दूसरी प्रतियोगिता में मिलने वाले मेडल को खिलाड़ी क्यों काटते हैं और इसके पीछे की वजह क्या है?
सोसाइटी ऑफ ओलंपिक हिस्टोरियन्स के प्रेसिडेंट डेविड वौलेनचिन्सकी DAVID WALLENCHINSKI ने बताया है कि खिलाड़ी ऐसा इसलिए करते है क्योंकि फोटोग्राफर खिलाड़ियों को ऐसा करने के लिए कहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1800 के दौर कैलिफोर्निया में गोल्ड मेडल को काटने का चलन था, क्योंकि काटकर यह देखा जाता था कि मेडल रियल है या फेक है। बताया है कि pure गोल्ड से बने मेडल को साल 1912 में अंतिम बार दिया था, लेकिन उसके बाद से शुद्ध सोना नहीं दिया जाता है।
हालाँकि एक बारी ऐसे ही समय पर एक फोटोग्राफर ने विजेता की ऐसे मैडल को काटते हुए फोटो ले ली थी जिसके बाद उस तस्वीर को खूब सरहाया गया था| ऐसी फोटोज अखबारों और मैग्जीन में अलग एंगल से लगती हैं जिसे लोग खूब पसंद करते हैं।और इसी कारण अब फोटोग्राफर के कहने पर खिलाड़ी इस तरह की फोटो खिचवाते हैं
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