The letter was found in the National Archives.. |पत्र राष्ट्रीय अभिलेखागार में पाया गया..
गांधी को 1930 में निजी खर्च के लिए अंग्रेजों से 100 रुपये प्रति माह मिलते थे। उस समय 10 ग्राम सोने की बाजार कीमत 18 टका थी। यानी उस समय 100 रुपये का बाजार मूल्य वर्तमान में 2.88 लाख रुपये के करीब है। बुरा नहीं है, है ना? लेकिन उसे पैसे क्यों मिले? अंग्रेजों के काम में मदद के भुगतान के लिए? स्मरण रहे कि उस समय असहयोग आन्दोलन चरम सीमा पर पहुँच रहा था। और हाँ, यह देश चरखा चलाकर स्वतंत्र नहीं हुआ है।

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