Question : अच्छा यूं ही जरा अपने से प्रश्न करते हैं?
एक समय 52 संस्कार थे हिंदुओं के... जो घटकर 16 हुए। आज लोग 16 संस्कार भी नहीं जानते।
आज जो प्रमुख संस्कार बचे हैं वो हैं--
नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन, उपनयन, विवाह, अंत्येष्टि
इसमें भी उपनयन संस्कार हर कोई नहीं करता है।
नामकरण भी अब शास्त्रों के हिसाब से नहीं होता बल्कि कोई यूनिक नाम ढूंढने में सब लगे रहते हैं। जन्म कुंडली का नाम भी बहुतों को अपना नहीं पता होगा।
अन्नप्राशन भी एक फॉर्मेलिटी रह गयी है और कुछ उस समय पार्टी का आयोजन करने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं।
मुंडन फिलहाल चल रहा है और मुंडन के बाद भी कई मुंडन होते रहते हैं।
विवाह- तो उसकी तो ऐसी तैसी मारी ही जा रही है।
फिर बचा अंतिम संस्कार- तो इसका नियम था कि घर से ही एक मशाल श्मशान तक जाती थी, जो अब नहीं दिखती। फिर वहां भी कुछ कर्मकांड होते थे, जो अब प्रदूषण की आड़ में बंद किये जा रहे हैं। अब तो वो इलेक्ट्रिक चिताएं लग चुकी हैं।
इसके बाद के कार्य भी जो तेरहवी से लेकर श्राद्ध होते हैं, उनपर भी आपको खूब ताने कसे जाते हैं कि मरने के बाद पानी चढ़ाने से क्या होगा? ये सब पाखण्ड है आदि आदि।
अब आप खुद हिसाब लगा लो कि एक हिन्दू होने के नाते आज आप कितने संस्कारो को लेकर चल रहे हो, क्योंकि जब संस्कार ही नही हैं तो संस्कृति की ऐसी तैसी तो होनी ही है।

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