Israel : इसराइल को लेकर क्या इस्लामिक देश एकजुट हो पाएंगे?
इसराइल और फलस्तीनियों का विवाद कई बार जंग का रूप ले चुका है. इसराइल के जन्म से ही फ़लस्तीनियों के अपने मुल्क का सवाल बना हुआ है लेकिन वक़्त के साथ इसका समाधान मिलने के बजाय स्थितियां और जटिल होती जा रही हैं.
फ़लस्तीनियों को उम्मीद रहती है कि अरब के इस्लामिक देश कम से कम इसराइल के ख़िलाफ़ उनके साथ खड़े होंगे. लेकिन सबके अपने-अपने हित हैं और उसी के अनुसार सबकी प्रतिक्रिया होती है.
जब यूएई, मोरक्को, बहरीन और सूडान ने अब्राहम अकॉर्ड्स के ज़रिए इसराइल को मान्यता दी और औपचारिक रिश्ते कायम किए तो तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने विरोध किया था जबकि तुर्की के इसराइल के साथ राजनयिक संबंध पहले से ही थे.
तुर्की और इसराइल में 1949 से ही राजनयिक संबंध हैं. तुर्की इसराइल को मान्यता देने वाला पहला मुस्लिम बहुल देश था.
इस दौरे में उन्होंने तत्कालीन इसराइली पीएम एरिएल शरोन से मुलाक़ात की थी और कहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से न केवल इसराइल को ख़तरा है बल्कि पूरी दुनिया को है.
2010 में मावी मरमार वाक़ये के बाद से दोनों देशों के बीच कड़वाहट थी. इस घटना में इसराइली कमांडो ने तुर्की के पोत में घुसकर उसके 10 लोगों को मार दिया था.
लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के में कारोबारी संबंध हैं. 2019 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6 अरब डॉलर से ज़्यादा का था.
इसराइल मामले में तुर्की की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि उसका राष्ट्रीय हित किस हद तक प्रभावित नहीं होता है.
हमास के हमले से ठीक पहले अर्दोआन इसराइल जाने वाले थे.
सऊदी अरब भी खुलकर फ़लस्तीनियों के अधिकारों की बात करता है लेकिन इस हद तक नहीं जाता है कि पश्चिम को एकदम से नाराज़ कर दे.
यूएई ने तो इसराइल और गज़ा में मौजूदा हिंसा के लिए हमास को ज़िम्मेदार ठहराया है. ईरान खुलकर हमास का समर्थन कर रहा है और इसराइल पर सीधे उंगली उठा रहा है. ईरान के हितों का अपना समीकरण है और उसी के हिसाब से वह प्रतिक्रिया दे रहा है.
इसराइल और अमेरिका की जिगरी यारी दशकों पुरानी है. अमेरिका इसराइल को देश के तौर पर मान्यता देने वाला पहला मुल्क है.
हमास के साथ जंग के एलान के साथ ही इसराइल को अमेरिका ने अपना युद्धपोत और लड़ाकू विमान भेजे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइल को गज़ा युद्ध के बीच सैन्य और राजनीतिक मदद देने का वादा किया है.
इसराइल दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां की बहुसंख्यक आबादी यहूदी है. ये एक छोटा सा देश है लेकिन इसकी सैन्य ताक़त का लोहा दुनिया मानती है.
इसराइल भूमध्यसागर के पास मध्य पूर्वी देश है. इसके आसपास मिस्र, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, इराक़, तुर्की, ईरान, कुवैत, मोरक्को, सऊदी अरब, फ़लस्तीन, सूडान और ट्यूनीशिया जैसे कई मुस्लिम देश हैं.
इनमें से कई ऐसे भी देश हैं जो इस्लामिक देशों के संगठन यानी ओआईसी के सदस्य हैं और उनकी अमेरिका से भी दोस्ती है.

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