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'The Vaccine War' movie review | 'द वैक्‍सीन वॉर' मूवी रिव्‍यू

'The Vaccine War' movie review | 'द वैक्‍सीन वॉर' मूवी रिव्‍यू


'The Vaccine War' movie review | 'द वैक्‍सीन वॉर' मूवी रिव्‍यू


'द वैक्‍सीन वॉर' की कहानी

कहानी की शुरुआत होती है, जनवरी 2022 से। पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा है और तभी ICMR ( द इंडियन काउंसल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के महानिदेशक बलराम भार्गव को एक ऐसे वायरस के बारे में पता चलता है जिसका मरीज चीन के वुहान में पाया गया है। फिल्म की कहानी को 12 भागों में बांटा गया है। कोरोना वायरस का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा? इस पर चर्चा के बाद बलराम भार्गव (नाना पाटेकर) और उनकी पूरी टीम को कोविड-19 के खिलाफ भारत की पहली वैक्सीन बनाने की जिम्मेदारी दी जाती है। बलराम की पूरी टीम युद्ध स्तर पर टीका बनाने की मुहिम में जुट जाती है। कहानी साइंटिस्‍ट्स द्वारा टीका बनाने की चुनौतियों के साथ-साथ इनके घरेलू पहलुओं की जटिलताओं के साथ आगे बढ़ती है।


बलराम की इस टीम में पललवी जोशी, निवेदिता भट्टाचार्य, सप्तमी गौड़ा जैसी होनहार और जुझारू वैज्ञानिक हैं, तो दूसरी तरफ वैक्सीन बनाने के इस असंभव से लगने वाले काम को पस्त करने के लिए सरकार विरोधी पत्रकार राइमा सेन भी हैं, जो भारत की बनाई हुई वैक्सीन को लगातार सब्सटैंडर्ड का दर्जा देकर नकारती जाती है और इसकी मंशा पर सवाल उठाती है। कोरोना काल में अपर्याप्त संसाधनों और विरोध के बीच भारत के वैज्ञानिक न हारने वाले जज्बे के साथ कैसे अपनी बनाई हुई वैक्सीन से देश और दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए मसीहा साबित होते हैं, यही फिल्म का कलाइमेक्स है।


'द वैक्‍सीन वॉर' का ट्रेलर

https://www.youtube.com/watch?v=oiGUggg32lI


स्टार की परफॉरमेंस

अभिनय के मामले में यह फिल्म कहीं भी कमतर साबित नहीं हुई हैं। बलराम भार्गव के रूप में नाना पाटेकर की दमदार वापसी हुई है। उनके अभिनय की विशिष्ट शैली और पॉज लेकर डायलॉग बोलने वाला अंदाज पर्दे पर मजेदार लगता है। फिल्म में महिला साइंटिस्ट्स के रूप में कई समर्थ अभिनेत्रियों का जलवा देखने को मिलता है, जिसमें पल्लवी जोशी अपने मजबूत अंदाज में नजर आती हैं। संवाद अदायगी और इमोशनल सीन्स में वे दिल जीत लेती हैं। वैज्ञानिकों की टीम में शामिल सप्तमी गौड़ा और निवेदिता बसु ने बहुत उम्दा काम किया है। अनुपम खेर जैसे काबिल अभिनेता को ज्यादा स्क्रीन स्पेस नहीं दिया गया है। सहयोगी कास्ट भी दमदार है। एंटी गवर्नमेंट जर्नलिस्ट के रूप में राइमा सेन ने सशक्त अभिनय किया है।


डायरेक्शन

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की यह फिल्म कोरोना के असली योद्धा यानी महिला साइंटिस्ट्स द्वारा बनाई गई वैक्सीन पर आधारित है। उनकी यह फिल्म गोइंग वायरल पर आधारित है। भारत बायोटेक द्वारा आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के सहयोग से बनाए गए टीके को वैक्सीन को बनाने के पूरे प्रोसेस को उन्होंने काफी इमोशनल अंदाज में दर्शाया है। वो जहां साइंटिस्ट्स की कार्यप्रणाली, चुनौतियों, आर्थिक फंड की कमी के साथ-साथ उनके मानवीय पहलुओं को खूबसूरती से दर्शाते हैं, वहीं देशभर में फैली कोरोना की विभीषिका को भी दिखाते हैं। फिल्म में ऐसे कई पल हैं, जब देश पर गर्व की अनुभूति होती है और हम अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाने की मनोदशा में आ जाते हैं। फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी रोचक है और बांधे रखता है, मगर सेकंड हाफ में फिल्म गति धीमी पड़ जाती है, सरकार की उपलब्धियों का महिमामंडन करती नजर आती है।


तकनीकी पक्ष

कहानी में सरकार विरोधी मीडिया की प्रतनिधि के रूप में साइंस एडिटर बनी राइमा सेन का किरदार अतिरेक करता नजर आता है। असल में वही कहानी की असली खलनायिका हैं , मगर विवेक इस पहलू को संतुलित करने से चूक गए हैं। मीडिया का एक नकारात्मक पहलू के साथ उन्हें सकारात्मक रूप को भी दर्शाना चाहिए था। चूंकि फिल्म एक साइंटिफिक प्रोसेस पर है, तो कई जगहों पर हल्‍के-फुल्‍के दृश्यों का अभाव नजर आता है। फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर कमजोर है।


देखे या नहीं

कोरोना काल पर आधारित फिल्मों के शौकीन और कलाकारों के दमदार अभिनय के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है।]


और अंत में रेटिंग

फिल्म को 2.5 स्टार मिले हैं


ऐक्टर: नाना पाटेकर,पल्लवी जोशी,निवेदिता भट्टाचार्या,अनुपम खेर,राइमा सेन,गिरीजा ओक

डायरेक्टर : विवेक अग्निहोत्री

श्रेणी: Hindi, Drama

अवधि: 2 Hrs 2 Min

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