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गुड़ का भोग | Gud Ka Bhog | Motivational Story | Heart Touching Story | RKT News

 गुड़ का भोग | Gud Ka Bhog | Motivational Story | Heart Touching Story | RKT News


गुड़ का भोग | Gud Ka Bhog | Motivational Story | Heart Touching Story | RKT News



 किसी गाँव में छज्जूमल नाम का एक गुड़ बेचने वाला अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ रहता था। उसकी पत्नी हर रोज गोपाल जी को भोग लगाती आरती करती उनका पूरा ध्यान रखती थी। उधर छज्जूमल दूर गाँव में जाकर गुड़ बेचता था। इसी तरह उनकी जिंदगी अच्छे से चल रही थी। 


उसके बेटे बहुत नेक थे। परन्तु दुर्भाग्यवश छज्जूमल की पत्नी अचानक चल बसी। छज्जूमल बहुत उदास रहने लगा। फिर भगवान् की जो इच्छा मान कर फिर वह अपने काम वापस जाने लगा। उसके बेटे उसको समझाते बाबा अब हम अच्छा कमा लेते हैं हैं आप अब घर बैठे परन्तु छज्जूमल ना माना


उसकी पत्नी रोज गोपाल जी को भोग लगाती थी। उसको तो भोग लगाना आता नहीं था। परन्तु अब थोड़ा सा गुड़ ठाकुर जी के आगे रख देता ठाकुर जी तो ठहरे मीठे के शौकीन। उनको तो गुड़ खाने का चस्का लग गया। अब रोज काम जाने से पहले गोपाल जी को थोड़ा सा गुड़ भोग लगा देता था।


एक दिन दोनों बेटे बोले बाबा घर की मरम्मत करवानी हैं तो थोड़ा सा सामान इधर-उधर करना पड़ेगा। बाबा बोला ठीक, तो उन्होंने गोपाल जी को भी अलमारी में भूलवश रख दिया। घर का काम शुरू हो गया पर गोपाल जी को अब गुड़ का भोग ना लगता।


छज्जूमल अब रोज की तरह गाँव में गुड़ बेचने गया रास्ते में थोड़ा सा विश्राम करने के लिए एक वृक्ष के नीचे बैठ गया। ठण्डी ठण्डी हवा चल रही थी तभी छज्जूमल  कि आँख लग गई। तभी उसे लगा कि कोई उसे उठा रहा है और कह रहा है बाबा आज गुड न दोगे। छज्जूमल ने एक दो बार अनसुना कर दिया उसे लगा कि कोई सपना है पर जब उसे कोई लगातार हिलाता जा रहा था और बोल रहा था। अचानक वह उठा और देखता है कि 6- 7 साल का बालक उसे कह रहा है कि बाबा आज गुड़ ना दोगे।

छज्जूमल मन मे सोचने लगा कि मैंने तो इस बालक को कभी गुड़ न दिया फिर उसने सोचा कि गाँव में ही किसी का बच्चा होगा। छज्जूमल ने कहा हाँ बेटा ले लो। तो उसे थोड़ा सा गुड़ दे दिया। गुड़ लेकर वह बालक गुड़ को मुँह में डालकर आहा आहा मीठा-मीठा कह कर वहाँ से भाग गया। अब तो रोज ही वह बालक छज्जूमल को मिलता उससे गुड़ लेता और नाचता गाता मीठा-मीठा कह कर भाग जाता। छज्जूमल भी बच्चा समझकर उसको रोज गुड़ दे देता। 

अब घर का काम पूरा हो गया तो उस दिन घर में हवन पूजन रखा गया। छज्जूमल  अब गुड़ बेचने ना गया। परन्तु वह बालक तो अपने समय पर उस जगह पहुँच गया। अब छज्जूमल वहाँ ना आया।


बालक ने तो घर जाकर मैया की जान खा ली और ता ता थैया मचाने लगे बोले मुझे तो गुड़ ही चाहिए। मैया ने बहुत समझाया बर्फी मिठाई सब लाकर दिए लेकिन वह तो कहते मैं तो गुड़  ही खाऊँगा। मैया से बालक का रोना सहन न हुआ। और छज्जूमल  के घर का पता पूछते पूछते उसके घर पहुँच गई।  


घर जाकर कहती बाबा मेरे बालक हो तो आपने गुड़ की आदत डाल दी आज आप आए नहीं ना आए तो गुड़ खाए बिना वह मान नहीं रहा। छ्ज्जूमल को उस बालक पर बड़ा प्यार आया उसने उसको अपनी गोद में बिठाया और गोदी में बिठा कर गुड़ खिलाने लगा। पता नहीं क्यों उस बालको गुड़ खिलाते खिलाते छज्जूमल की आँखों में अश्रु धारा बह निकली। हृदय में अजीब सी हलचल होने लगी। गुड़ खाकर बालक मीठा मीठा कह कर अपने घर चला गया।


हवन पूजन के बाद में फिर गोपाल जी की मूर्ति को रखा गया। अगले दिन छज्जूमल नियम से गोपाल जी को गुड़ का भोग लगाकर काम पर चला गया। रास्ते में उसी जगह पर रुका अब तो उसे भी उस बालक को गुड़ खिलाने की जल्दी थी। परन्तु वह बालक आया ही नहीं। ऐसे ही तीन-चार दिन बीते जो उसका मन बहुत बेचैन हुआ कि कहीं बालक बीमार तो नहीं। उसने गाँव जाकर सबको बालक के बारे में पूछा तो सब ने कहा ऐसा तो यहाँ कोई भी बालक नहीं रहता। वह हैरान परेशान होकर घर पहुँचा।

घर पहुँच कर जब वह मन्दिर में बैठा तो गोपाल जी की तरफ देखा वह मन्द मन्द मुस्कुरा रहे थे। वह जैसे वह कह रहे हो बाबा जी मैं वही बालक हूँ। छज्जू मल का माथा ठनका कि वह सोचने लगे कि यह तो साक्षात गोपाल जी मुझसे गुड़ खाने आते थे। वह कहने लगे हे गोपाल जी धन्य हो आप। गोपाल जी की ओर देख के उसकी आँखों में अश्रु धारा बहने लगी..!!

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