सच्चा सुख | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story
एक बार भक्त प्रहलाद से दानवों ने पूछा – हे प्रहलाद ! सच्चा सुख कैसे प्राप्त होता है?
यह सुनकर भक्त प्रहलाद हस पड़े । फिर उन्होंने बोला – सच्चा सुख पाना बहुत ही कठिन है। यह तुम्हारे लिए असंभव है। क्योंकि तुम सच्चा सुख पाने वाले मार्ग पर नहीं चल सकते ।
दानवों ने सच्चे सुख के मार्ग को बताने के लिए भक्त प्रहलाद से बार बार आग्रह किया तो प्रहलाद बोले – जन कल्याण के द्वारा ही सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है। किन्तु तुम लोग यह नहीं कर सकते क्योंकि तुम लोगो अपना बचपन खेल कूद और शैतानियों में गुजारे हो। युवा होने पर भोग तृष्णा में पाप करते हो और वृद्धावस्था में तुम्हारे पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता है। सच्चा सुख तो कल्याण कार्यों के द्वारा ही प्राप्त हो सकता है। इसी में आत्मानंद और परमानंद प्राप्त होता है।।
प्रहलाद ने फिर उन दानवों से कहा – मै भी तो एक दानव राज ही हूं परन्तु मै जनकल्याण में लगा हूं। ईश्वर पर भरोसा करता हूं। इसलिए सुखी हूं। तुम लोग भी ऐसा कर लो तुम्हारा भी कल्याण हो जाएगा।
याद रखो ! किसी भी आयु में प्रभु सुमिरण तथा दुष्कर्मों का त्याग कर के उनका प्रायश्चित कर लेने से सदमार्ग साफ दिखाई देता है। उस पर चलते रहने से गुरुकृपा होती है तब जाके सच्चा सुख मिलता है।
प्रहलाद की इन बातो को सुनकर उन दानवों ने संकल्प लिया की जीवन का जो बचा हुआ भाग है उसे व्यर्थ ना कर के जनकल्याण में समर्पित कर सच्चा सुख प्राप्ति वाले मार्ग पर चलेंगे।
0 टिप्पणियाँ