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दृढ़ निश्चय का फल | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story

 दृढ़ निश्चय का फल | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story



बहुत पुरानी बात है एक जंगल एक गुरुकुल था जिसमें बहुत सारे बच्चे पढ़ने आते थे। एक बार की बात है ,गुरूजी सभी विद्यर्थियों को पढ़ा रहे थे मगर एक विद्यार्थी ऐसा था जिसे बार बार समझाने पर भी समझ में नहीं आ रहा था। गुरूजी को बहुत तेज से गुस्सा आया और उन्होंने उस विद्यार्थी से कहा – ‘ जरा अपनी हथेली तो दिखाओ बेटा । विद्यार्थी ने अपनी हथेली गुरूजी के आगे कर दी। हथेली देखकर गुरूजी बोले – बेटा ! तुम घर चले जाओ ,आश्रम में रहकर अपना समय व्यर्थ मत करो तुम्हारे भाग्य में विद्या नहीं है ।


शिष्य ने पूछा – क्यों गुरूजी?

गुरूजी ने कहा – तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा नहीं है। गुरूजी ने एक दूसरे विद्यार्थी की हथेली उसे दिखाते हुए बोले – यह देखो ! यह है विद्या की रेखा । यह तुम्हारे हाथ में नहीं है । इसलिए तुम समय नष्ट ना करो , घर चले जाओ । वहां अपना कोई और काम देखो ।विद्यार्थी ने अपनी जेब से चाकू निकाल, जिसका प्रयोग वह दातुन काटने के लिए किया करता था । उसकी पैनी नोक से उसने अपने हाथ में एक गहरी लकीर बना दी । हाथ लहूुहान हो गया । तब वह गुरूजी से बोला – मैंने अपने हाथ में विद्या की रेखा बना दी है, गुरूजी। यह देखकर गुरूजी द्रवित हो उठे और उन्होंने उस विद्यार्थी को गले से लगा लिया ।गुरुजी बोले – तुम्हे विद्या सीखने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती ,बेटा! दृढ़ निश्चय और परिश्रम हाथ की रेखाओं को भी बदल देते है ।

वह विद्यार्थी आगे चलकर ‘ महर्षि पाणिनि’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जिसने विश्व प्रसिद्ध व्याकरण ‘ अष्टाध्याई ‘ की रचना की । इतनी सदिया बित जाने पर भी विश्व की किसी भी भाषा में ऐसा उत्कृष्ट और पूर्ण व्याकरण का ग्रंथ अब तक नहीं बना।

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