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माँ का आशीर्वाद | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story

 माँ का आशीर्वाद | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story 

RKT News


स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका जाने वाले थे, वे अमेरिका यात्रा में जाने से पहले अपनी माँता जी के पास आशीर्वाद लेने पहुंचे,


माँ से बोले हे माँ आशीर्वाद दो, मै अमेरिका जा रहा हूँ। विवेकानंद जी की इस बात को सुन कर माँ जी चुप रहीं, जैसे उनको कोई प्रभाव ही नहीं पड़ा।



विवेकानंद जी ने एक बार फिर माँ से कहा, माँ मुझे आशीर्वाद दो, माँ फ़ीर भी चुप रहीं। 



फीर कुछ देर बाद माँ ने स्वामी विवेकानंद जी को, दूसरे कमरे में पड़ी एक चाकू को लाने के लिए कहा।


विवेकानंद जी जल्दी से गए और चाकू ले आकर माँ को दे दिए। चाकू को पाते ही, माँ ने स्वामी जी अनेकों आशीर्वाद दे डाले।


स्वामी विवेकानंद जी को चाकू और आशीर्वाद का सम्बन्ध समझ में नहीं आया, वे अचंभित हो गए की माँ ने चाकू पाते ही आशीर्वाद क्यों दिया।


वे माँ से चाकू और आशीर्वाद के सम्बंध में पूछ ही लिए।


माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, बेटा जब मैंने तुमसे चाकू माँगा, तब तुमने मुझे चाकू लाकर दिया, और चाकू देते समय उसके धार वाले हिस्से को अपनी ओर रखा और चाकू का हेंडल मुझे पकड़ाया। 


इससे मै समझ गयी, की तुम सारी बुराइयों को अपने पास रखकर, लोगों में अच्छाइयां बांटोगे। स्वयं कष्ट सह कर लोगों में लोगों में खुशी बांटोगे, खुद विष पीकर लोगों को अमृत बांटोगे, इसलिए मै तुम्हे हृदय से आशीर्वाद दे रही हूँ बेटा। 


माँ के इस बात को सुनकर विवेकानंद जी बड़े ही निश्छल हृदय से बोले, पर माँ मैने तो चाकू का धार इसलिए अपनी ओर रखा, ताकि आपको कोई चोट ना पहुंचे।  


माँ और अधिक प्रसन्न हो गयीं, व प्रसन्नता से विवेकानंद जी को कहने लगी कि, तब तो और अच्छी बात है बेटे, तुम्हारे तो स्वभाव में ही भलाई है।


और माँ ने ख़ुशी-ख़ुशी विवेकानंद जी आशीर्वाद देते हुए अमेरिका भेजा। 


 प्रसंग का तात्पर्य यह है की अगर हृदय में भलाई व परोपकार है, तो वह छुपाए नहीं छुपती। व्यक्ति के गुण व अवगुण उसके स्वभाव में नजर आ ही जातें हैं।

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