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व्यर्थ की जिज्ञासा | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story

 व्यर्थ की जिज्ञासा | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story 

व्यर्थ की जिज्ञासा | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story


एक बार एक शिष्य गौतम बुद्ध के पास आकर बोला,,, भगवान आप ने आज तक यह नहीं बताया कि मृत्यु के पश्चात पूर्ण बुद्ध रहते हैं या नहीं?


इस पर बुद्ध बोले – हे शिष्य… मुझे यह बताओं कि भिक्षु होते समय क्या मैने तुमसे यह कहा था कि तुम मेरे ही शिष्य बनना?. शिष्य ने कहा नहीं गुरुवेद.


बुद्ध बोले – यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर अचानक एक विषैला बाण आकर लगे और तब वह यह कहे कि बाण मारने वाला किस जाती का है, जब तक पता नहीं चलेगा तब तक ना तो मै बाण निकलूंगा और ना ही इलाज़ कराऊंगा. तब इस स्थति में क्या होगा, शिष्य तुम ही बताओ.


शिष्य बोला – इस स्थिति में तो उसकी मृत्यु हो जाएगी गुरुदेव। बुद्ध बोले – अब तुम ठीक कह रहे तो वह व्यर्थ का हठ करेगा तो मारा जायेगा. इस समय बाण मारने वाला से अधिक जिम्मेदार वह व्यक्ति होगा जो व्यर्थ की जिद के लिए बाण नहीं निकलेगा.


उसी प्रकार तुम शिष्य हो तुमने ज्ञान अर्जित की है. तुम्हे जितना ज्ञान मिला है उसका अनुसरण करो, उसे आचरण में लाओ, इसी से तुम्हारा कल्याण होगा तुम व्यर्थ की चिंता क्यों करते हो.


“संशयात्मा विनष्यते” अर्थात संशय आत्मा को नष्ट कर देती है. इसलिए जीवन को संशय रहित रखें.


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