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चाँद में दाग और दीपक के नीचे अँधेरा | Chand Me Daag | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story

 चाँद में दाग और दीपक के नीचे अँधेरा 

RKT News


एक समय की बात है, गुरूजी अपने शिष्यों को ज्ञान की बातें बता रहे थे, और उनकी समस्याओं और प्रश्नो का जवाब (हल) भी दे रहें थे। जब लगा की शिष्यों की शिक्षा पूरी हो गयी तब गुरूजी ने सभी शिष्यों से कहां – शिष्यों अगर आप के मन में अभी भी कोई शंका या प्रश्न हो तो मुझसे पूछ सकते हो। 


गुरूजी की इस बात को सुनकर एक शिष्य ने जो गुरूजी के पास काफी लम्बें समय से रहता था और वह अपने आप को बहुत ही ज्ञानवान भी समझता था उसने सवाल किया – गुरूजी आप मुझे बताइये की चाँद में दाग क्यों होता है ? और यह भी बताएं की दीपक के नीचे अंधेरा क्यों होता है ?


शिष्य द्वारा इस सवाल के किये जाने पर गुरूजी निराश हो गए और दुखी मन से शिष्य को कहा – शिष्य, मुझे तुमसे ऐसे सवाल की उम्मीद नहीं थी, तुम्हें मेरे साथ रहते हुए बहुत समय हो गया है, परन्तु अभी भी तुम ज्ञान की पहली सीढ़ी ही नहीं चढ़ पाए हो, अभी भी वहीँ पर अटके हुए हो। 


गुरूजी की इस बात को सुनकर शिष्य अत्यत दुखी हुआ. उसे गुरूजी द्वारा ऐसे शब्द कहें जाने की उम्मीद नहीं थी। और वह शिष्य अपने आप को ज्ञानवान अक्लमंद भी समझता था सो उसके अहम को बहुत ठेस पंहुचा। 


उसने गुरूजी से कहा – गुरूजी, मै इतने समय से आपसे ज्ञान अर्जित कर रहा हूँ आपके साथ रहकर कितना कुछ ज्ञान की बातें सीखा है मैने फिर भी आप मेरे सवालों का ऐसा उत्तर दे रहे हैं, आपके इस उत्तर ने मुझे अत्यंत दुःख पहुंचाया है।


गुरूजी ने जवाब दिया की दुःख तो मुझे भी बहुत हुआ है शिष्य तुम्हारे इस सवाल से काश इन सवालों के जगह पर तुम ये पूछते – गुरूजी, चाँद में इतनी चांदनी क्यों है ? और दीपक में इतनी रोशनी क्यों है ? 


फिर मै तुम्हें जीवन के अत्यंत रहस्यों में से कुछ मोती चुन कर देता, फिर मै तुम्हें बताता की जीवन क्या है. जीवन का अर्थ व मतलब क्या है।क्योंकि जब तुम किसी की अच्छाइयों को छोड़कर उसके बुराइयों पर ध्यान देते हो या उसके विषय में चिंतन करते हो, तो जाने अनजाने ही सहीं परन्तु उन बुराइयों के कुछ हिस्से को अपने अंदर उतार लेते हो। 


ठीक इसी प्रकार अगर आप किसी बुरे चीज़ में भी सिर्फ अच्छाइयों को देखते हो उस अच्छाइयों को बारें में चिंतन करते हो तब आपमें उस अच्छाई का कुछ अंश समाहित हो जाता है। 


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