जेंटलमैन | Gentleman | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story
बात उस समय की है जब स्वामी विवेकानंद जी प्रथम बार विदेश यात्रा पे गए. वहां उनके स्वागत करने के लिए कोई व्यक्ति नहीं था. विवेकानन्द जी पूरी तरह भगवा कपडे पहने हुए थे. उनके माथे पर पगड़ी बंधी हुई थी.
जब वे रास्ते से गुजर रहे थे, उन्हें एक विदेशी दंपत्ति ने देखा और स्त्री ने मजाक में कहा – “देखो जेंटलमैन को”
विदेश में पैंट-शर्ट पहनने वाले को जेंटलमैन कहा जाता था. विवेकानंद जी के विचित्र पहनावे को देखकर उस स्त्री ने हसी उड़ाई थी. यह बात स्वामी जी के कानों तक सुनाई दे गयी.
जब वे स्त्री-पुरुष विवेकानन्द जी के पास से निकले, तब स्वामी जी ने कहा…. बहन इधर आते वक्त आपने मुझे देखकर यह कहा – “देखो इस जेंटलमैन को”
स्त्री ने स्वीकार किया और बोली – आपका विचित्र पहनावा को देखकर मैने परिहास किया था.
इस पर विवेकानंन्द जी बोले – आपने यह कहा, इसका मुझे कोई दुःख नहीं है. ना ही कोई क्षोभ है. परन्तु इस शब्द के प्रति हमारे जीवन में जो दृष्टि है. उसे स्पष्ट कर रहा हूँ.
बहन।। आपके यहाँ जेंटलमैन का निर्माण दर्जी करता है. परन्तु हमारे यहाँ जैनटलमैन का सृजन संत करता है. अपने विचारों में सुंदरता लाने के बाद ऐसा होता है.
आपके देश में व्यक्ति दर्जी द्वारा सिले कपडे पहन कर बाहर निकलता है और अंदर से भले ही कुछ भी ना हो, फिर भी वह जैनटलमैन कहलाता है.
हमारे देश में व्यक्ति कैसा भी कपडा पहने अगर वह अंदर से संस्कारी होता है. तो वह जैनटलमैन अर्थात सज्जन कहलाता है. आपके और मेरे विचार में जैनटलमैन की व्याख्या का बस इतना ही फर्क है.
“हमारी भारतीय संस्कृति महान है”

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