मनपसंद दीपक | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story
एक राजा जो बहुत ही दयावान और प्रजाप्रिय था। उसकी एक बेटी थी। वह बहुत ही सुन्दर और बुद्धिमान थी। राजकुमारी जब बड़ी हुई तो राजा को उसके विवाह की चिंता सताने लगी। राजकुमारी के लिए वर ढूंढने से पहले राजा ने राजकुमारी की राय जाननी चाही।
राजकुमारी ने काफी सोच विचार कर अपने पिता से कहा– पिता जी ! जो व्यक्ति मेरी पसंद का दीपक ला देगा मै उसी से विवाह करूंगी।
अगले दिन राजा ने राजकुमारी की शर्त के साथ स्वयंवर की घोषणा कर दी। स्वयंवर का दिन आ गया , हाथ में दीपक लिए हुए युवकों की कतार लग गई । वह भी बहुत ही लंबी कतार। कोई युवक राजकुमार था तो कोई नगर सेठ, कोई साहूकार था तो कोई साहसी बहादुर। सबके पास तरह तरह के दीपक थे । छोटे–बड़े , सोने–चांदी के हीरे–जवाहरात के जगमगाते सुन्दर नक्काशी वाले दीपक ।
राजकुमारी सबके दीपक देखती हुई कतार के अंत तक जा पहुंची मगर अबतक उसको मनपसंद दीपक नहीं मिला । लेकिन कतार के अंत में खड़े युवक के हाथ में कोई दीपक नहीं था । राजकुमारी ने उस युवक से पूछा – आप अपने साथ दीपक नहीं लाए ?
युवक ने दाए बाए देखा , थोड़ी सी गीली मिट्टी उठाकर एक गोला बनाया और फिर उसे बाए हाथ में लेकर उसने अपने दाए कुहनी से दबा दिया । मिट्टी का दीपक तैयार हो गया ।राजकुमारी ने मुस्कुराकर वरमाला उस युवक के गले में डाल दी।
मित्रों" दीपक का काम प्रकाश देना है फिर चाहे वह सोने का हो या मिट्टी का। जिस समय प्रकाश की आवश्यकता हो तब क्या हम सोने या चांदी के दीपक को ढूंढने अथवा खरीदने निकलेंगे ?
राजकुमारी को दीपक की जरूरत नहीं थी । दरअसल वह तो सिर्फ प्रतिभा और दूरदर्शिता की परीक्षा ले रही थी।
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