साधना का मार्ग भक्तिभरा | Sadhana Ka Marg | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल स्टोरी | Heart Touching Story | Motivational Story
एक व्यक्ति को महान गुरु की तलाश थी, उसके दिमाग में हजारों प्रश्न उठते थे। जिसका हल जानना व्यक्ति के लिए बहुंत जरुरी था, परन्तु उसके प्रश्नो का हल कोई नहीं कर पा रहा था।
एक दिन वह इसी तलाश में भटकता हुआ एक संत के पास पंहुचा। संत बहुत ही शांत सौम्य और तेज़ से भरा हुआ था। व्यक्ति इससे प्रभावित हुआ और संत के सामने अपने प्रश्न रखे। संत ने भी प्रश्न पूछने की आज्ञा दे दी।
व्यक्ति – हे प्रभु, मै कौन सी साधना करूँ।
संत बोले – तुम अपने मन में बैठा लो की मय भगवान के लिए दौड़ रहा हूँ, और जोर से दौड़ते रहो, यही तुम्हारी साधना है।
व्यक्ति बोला – तो क्या बैठकर करने के लिए कोई साधना नहीं है।
संत बोले – बिल्कुल है, तुम बैठो और यह ठान लो की तुम भगवान के लिए बैठे हो।
व्यक्ति ने फीर प्रश्न किया – हे प्रभु, कोई जप वगरा न करें।
संत बोले – किसी भी नाम का जप कर लो, और सोचों की जप भगवान के लिए कर रहा हूँ।
व्यक्ति से फिर सवाल उठाया – तो क्या क्रिया का कोई महत्व नहीं है, केवल भाव ही साधना है।
संत ने समझाया – क्रिया की भी महत्ता है, क्रिया से भाव और भाव से ही क्रिया होती है। इसलिए नजर हमेसा लक्ष्य पर होनी चाहिए, फिर जो करोगे वही साधना है।
सीख
कहानी का तात्पर्य यह है की कार्य जो भी करो अगर ठान लेते हो की मुझे इस लक्ष्य के लिए कार्य करना है या मुझे इस चीज़ में मन लगाना है, तो चाहे आप सोते जगते उठते बैठते उस चीज़ में मन लगा सकते हो।

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