ईश्वर का साथ | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल कहानी
एक संत हिमालय के रास्ते से अपने शिष्य के साथ यात्रा पर जा रहे थे। पूरा रास्ता हरे भरे पेड़ों से घिरा था। जंगली जानवरों की डरावनी आवाजें पल-पल में सुनाई दे रही थी। चलते-चलते रात होने को आई तो संत ने रात्रि विश्राम के लिए एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे अपना झोला रख दिया। पास ही बहतें नदी में हाथ मुंह धो कर संत एक पेड़ के नीचे संध्या पूजा में लीन हो गए। पास ही शिष्य भी बैठ गया।
कुछ ही देर बाद शिष्य के कानों में शेर की दहाड़ ने की आवाज सुनाई पड़ी। वह भय से थरथर कांपने लगा । तभी शेर उसे अपनी ओर आता हुआ दिखाई पड़ा। वह फुर्ती से पेड़ पर चढ़ गया। शेर पेड़ के नीचे आया। उसने ध्यान मग्न हुए संत को सूंघा, उनके चारों ओर घूम कर चक्कर काटा और कुछ क्षण मौन खड़े होकर चुपचाप वापस चला गया।
मौन साधे सारा दृश्य पेड़ पर चढ़ा हुआ सिर्फ देख रहा था। कुछ देर बाद संत का ध्यान टूटा दोनों ने कुछ जंगली कंदमूल खाए और सो गए। सुबह में नित्य कर्मों से निपट कर संत अपने गंतव्य की ओर चल पड़े । चलते-चलते संत को उड़ती हुई एक मधुमक्खी ने डंक मार दिया। उनकी पीड़ा से एकदम कराह उठे। शिष्य ने तुरंत संत की ओर देखा और पूछा- आदरणीय गुरुदेव! जब संध्या के समय शेर आया और उसने आपके शरीर को सूंघा तो साक्षात मृत्यु का आभास पाकर भी आप तनिक भी नहीं घबराए। मगर एक छोटी सी मधुमक्खी के काटने पर ही आप विचलित हो गए। आखिर ऐसा क्यों?
यह सुनकर संत ने शिष्य से कहा- जिस समय मैं ध्यान में था तो ईश्वर के साथ था। ईश्वर के साथ होने पर भला किस बात का डर कैसी चिंता। हां इस समय तू मेरे साथ है इसलिए मेरी चीख निकल गई।

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