भक्त की चमक | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल कहानी
एक ऋषि रोज लोटा मांजते थे,एक शिष्य ने कहा के लोटे को रोज़ मांजने की क्या जरूरत है?
सप्ताह में एक बार मांज लें,ऋषि ने कहा-बात तो सही है और उसके बाद उन्होंने उसे नही मांजा।
उस लोटे की चमक फीकी पड़ने लगी,सप्ताह बाद ऋषि ने शिष्य को कहा कि लोटे को साफ कर दो।
शिष्य लोटे को बहुत देर मांजने के बाद भी पहले वाली चमक नहीं ला सका।
फिर और मांजा,तब जाकर लोटा कुछ चमका,ऋषि बोले-लोटे से सीखो,जब तक इसे रोज मांजा जाता रहा,यह रोज चमकता रहा।
ऐसे ही साधक होता है अगर वह रोज मन को साफ न करे तो मन संसारी विचारो से अपनी चमक खो देता है
,इसको नित्य ध्यान से चमकाना चाहिए।यदि एक दिन भी भजन सुमिरण का अभ्यास छोड़ा तो चमक फीकी पड़ जाएगी।
इसीलिए मित्रों भक्त को भी नियत समय पर अपने जीवन रूपी लोटे को भगवान के समीप बैठ कर अपनी पूजा आराधना व भगवत सेवा करके मांजना चाहिए जिससे उसका जीवन भी उस लोटे की तरह चमकता रहे और उसकी चमक फीकी न पड़े।
अच्छा सोचिए,अच्छा कीजिए,अच्छे लोगों का सँग कीजिए।विचारों का संयम चित्त को शाँति और संतोष देगा॥
गुणोंका अभिमान होने से दुर्गुण अपने आप आ जाते हैं॥
मानं हित्वा प्रियो भवति,क्रोधं हित्वा न सोचति। कामं हित्वा अर्थवान् भवति,लोभं हित्वा सुखी भवेत्॥
अहंकार को त्याग कर मनुष्य प्रिय होता है,क्रोध ऐसी चीज है जो किसी का हित नहीं सोचती।कामेच्छा को त्याग कर व्यक्ति धनवान होता है तथा लोभ को त्याग कर व्यक्ति सुखी होता है॥

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