भगवान सबकी सुनते हैं | दिल को छूने वाली कहानी | प्रेरणादायक कहानी | मोटिवेशनल कहानी
शनिवार हो या सोमवार सुबह-सुबह दूध लाने की जिम्मेदारी अपनी ही रहती है। आज आँखें थोड़ी देर से खुली थी, तो हम मुँह हाथ धोकर झोला लिए सीधे चौराहे की तरफ भागे। डर लगा था की कहीं दुकान में दूध ख़त्म न हो गया हो नहीं तो घर में बवाल मच जाएगा । घर से निकले तो जल्दी में छाता ले जाना भूल गए थे, वैसे बारिश का अनुमान भी नहीं था। थोड़ी दूर निकलते ही बारिश आयी तो दौड़कर पास के शिवमंदिर में शरण ले लिए। मंदिर में हम आज शिवजी से एक ही दुआ मांगे की भगवान बस दूध ख़त्म न हुआ हो दुकान में। बारिश रुक रुक कर आ-जा रही थी और जब थोड़ी सी कम हुई तो वापस तेज क़दमों से हम दुकान की तरफ भागे । दूध लेकर लौटते समय भी बारिश ने हमारा पीछा नहीं छोड़ा और हमें फिरसे मंदिर में शरण लेनी पड़ी।
मंदिर में एक किसान दुआ मांग रहा था की भगवान अब एक दो दिनों तक अच्छी बारिश करवा दो, धान रोपनी हो जाएगी। पिछले फसल को बेचकर जो कुछ पैसे बचा के रखे थे वो बाबूजी के इलाज में खर्च हो गए हैं। अब मशीन से खेत पटवाकर रोपनी करवाने के लायक पैसे नहीं बचे है। पिछले कुछ महीनों में बारिश नहीं हुई है तो जमीन भी सुखी है इस वजह से बहुत पानी लगेगा रोपनी में। अब बचे हुए पैसों से पटाई करवाऊंगा या खाद खरीदूंगा।
मजदूरों का एक समूह जो की काम की तलाश में शहर की तरफ जा रहा था, बारिश की वजह से उसी मंदिर के छज्जे के नीचे शरण ले लिया था। किसान को दुआ मांगते देख उसमे से एक मजदूर झिझकते हुए मंदिर के अंदर गया और शिवजी से दुआ मांगने लगा। भगवान आज बारिश मत करवाना नहीं तो ठीकेदार छत की ढलाई नहीं करवाएगा और हमें बिना देहारी के ही बैरंग वापस लौटना पड़ेगा। बिना पैसे के बेटे के बुखार की दवाई कैसे ला पाउँगा। उसका शरीर पूरी रात बुखार से तप रहा था और उसने कल रात से हीं कुछ नहीं खाया है।
मजदूर को दुआ मांगते हुए देखकर किसान चुप हो गया। खैर थोड़ी देर में बारिश ख़त्म हो गई और हम दूध लिए हुए अपने घर की ओर भागे। वो मजदूर बाबा भोले की जय, जोर जोर से बोलते हुए शहर की ओर निकल पड़ा और बेचारा किसान भी उदास मन से अपने घर की तरफ चला गया ।
मैं दिनभर ऑफिस के कामों में इतना व्यस्त रहा की सुबह की घटना के बारे में सोचने का वक़्त ही नहीं मिला। रात में बिस्तर पर लेटे लेटे मैं ये सोच रहा था की भगवान ने किसान की नहीं सुनी, उन्होंने ठीक नहीं किया। क्या बारिश को समय से नहीं हो जाना चाहिए था, बेचारा अब रोपनी कैसे करवाएगा। इसी बीच हमें कब नींद आ गयी, पता ही नहीं चला। सुबह जब आँखें खुली तो हमने पाया की रात में जमकर बारिश हुई थी। अब मुझे विश्वास हो गया था की भगवान सबकी सुनते हैं। हम लोग भी न कितनी जल्दी अधीर हो जाते हैं..!!

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